शनिवार, 12 जून 2010

महानता नहीं, विकास है गंजापन

                                     कई लोग मिलते हैं जो कहते हैं, गंजेपन का महानता से गहरा रिश्ता है। गंजे केवल पुरुष होते हैं इसलिए महापुरुष शब्द बना महामहिला शब्द नहीं बना क्योंकि महिलाएं गंजा ( या गंजी.... पता नहीं क्या सही है) नहीं होतीं। कोई कहता है, गंजा व्यक्ति अमीर होता है या गंजापन अमीरी की निशानी है, आदि... आदि। इन सब बातों के लिए उदाहरण पेश करने वाले भी आपको मिल जाएंगे। कोई गांधी जी को याद करेगा कोई अनुपम खेर को कोई राकेश रौशन को, कोई नेहरू जी को तो कोई सरदार पटेल को।



लेकिन....जब गंजेपन को अपने पर लागू करता हूं तो सारी बातें ग़लत लगती हैं। कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति के मरने से पहले उसके बारे में कोई राय निश्चित मत करो....यानि. हो सकता है कि मैं भी किसी दिन अमीर या महान बन सकता हूं। लेकिन कहते तो ये भी हैं कि होनहार बिरवान के होत चिकने पात। उम्र के लगभग 27 बसंत देखने के बात मुझे खुद में ऐसा कुछ नज़र नहीं आया। यानि मैं महान या अमीर बन सकता हूं ये बस किस्मत की बात है जैसे, कौन बनेगा करोड़पति का हर्षवर्धन नवाटे।

                                                 


 खैर अब लौटते हैं समस्या की तरफ। THEORY OF EVOLUTION पर गौर करें और केवल इसके तस्वीरों पर ही नज़र डालें तो पता चलता है कि विकास के क्रम में मानव के शरीर पर बाल कम होते गये हैं। पहले पूरे शरीर पर बाल होते थे बिल्कूल घने ..... लेकिन धीरे- धीरे इसकी संख्या कम होती गई और विकास की जिस अवस्था में आज हम हैं...उसमें कुछ अंगों के अलावे केवल सर पर घने बाल रह गये हैं। कई बार इन चीजों को ADAPTATION या अनुकूलन से जोड़ा जाता है। लेकिन अवधारनाएं जिस तरह से बदल रही हैं और नये- नये तथ्य सामने आ रहे हैं वो सीधा संकेत करता है कि मानव शरीर पर बालों की जरूरत वैसी नहीं है जैसी बतायी जाती रही है। यानि बाल मानव शरीर से गायब हो जाएंगे और इसका पहला शिकार पुरुष बनेगा (GENE की संरचना के मुताबिक)। तो, जो लोग इस बात को लेकर दुःखी रहते हैं कि उनके सर से बाल गायब हो रहे हैं वो अब गर्व करना सीखें कि मानव विकास के क्रम की अगली पंक्ति में वो हैं, यानि ज्यादा विकसित।

                                                    एक और बात जो गौर करने लायक है वो ये कि गरीब गंजे क्यों नहीं होते हैं। दरअसल ये ऐसे लोग हैं जिनकी प्रजाति (जीन के आधार पर) अभी भी विकास के क्रम में पीछे है। इसलिए आदिवासी या गांव- ग्राम के लोगों के सर पर अभी भी आमतौर पर ज्यादा बाल देखने को मिलते हैं। चेहरे की बनावट के आधार पर भी देखें तो आप जितनी पुरानी तस्वीर देखेंगे उसके चेहरे की बनावट भी अलग नज़र आएगी जो आज के गांव-ग्राम के लोगों के अभी भी ज्यादा करीब है।

                                                 इसलिए छोड़िए बत्रा क्लिनिक और ट्रांसप्लांटेशन को ,,,,,, नाखून को घिसकर बाबा रामदेव को रमदेवा कहने से कुछ नहीं हासिल होने वाला। गिरते बालों को अगर कोई रोक सकता है तो वो है धरती मैया..... बाल इसपर आकर ठहर जाएंगे।

3 टिप्‍पणियां:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
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  2. मैं अभी 20 साल का हूं। मेरे बाल भी अभी कुछ 1 2 सालो में जलदी ही झड़ गए। अभी मेरी रातों की नींद उड़ चुकी हैं। लेकिन आपके इस लेख ने मुझे काफी शांति दी है जिसके लिए आपका बहुत ही ज्यादा आभार। धन्यवाद्

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